चिदंबरम मामले में क़ानून के जानकारों के 5 सवाल
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की उस विशेष याचिका पर सुनवाई होनी थी जिसमें उन्होंने हिरासत में लिए जाने से पहले दिल्ली हाईकोर्ट के उनकी अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी ठुकराए जाने के फ़ैसले चुनौती दी थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस दिन इसकी सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन मुकर्रर किया और उसी शाम को चिदंब रम हिरासत में ले लिए गए, फिर सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया. दिल्ली हाई कोर्ट में उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज किए जाने, सुप्रीम कोर्ट में उनकी अर्ज़ी पर तुरंत सुनवाई न होने और नाटकीय ढंग से उन्हें हिरासत में लिए जाने के इस पूरे घटनाक्रम पर क़ानूनविदों की राय बंटी हुई है. सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम के आवेदन को लिस्ट नहीं किए जाने पर भी जानकारों की राय बंटी हुई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने चिदंबरम की अग्रिम ज़मानत याचिका रद्द करते हुए अपने आदेश में कहा, "... तत्काल मामले के तथ्यों से प्रथम दृष्टया प्रकट होता है कि याचिकाकर्ता किंग पिन यानी इस मामले के मुख्य साज़िशकर्ता हैं. क़ानूनी अड़चनें लगाकर क़ानून का शासन स्थापित कर...