राजनीति में कैसी महिला पसंद आती हैं?: ब्लॉग
हमारे चारों ओर हर व़क्त सुंदर चेहरों की तारीफ़ , सुंदर ना होने की हीन भावना और सुंदरता निखारने के तरीकों की नुमाइश. मतलब कितनी भी पढ़ी-लिखी हो और अपने काम में तेज़ पर थोड़ा सुंदर भी हो जाती तो बेहतर होता. सुंदरता की इस श्रेष्ठता से मैं इत्तफ़ाक नहीं रखती पर दुनिया रखती है और इसीलिए हैरान हो जाती हूं जब देखती हूं कि कैसे वही सुंदरता बोझ बन जाती है. चेहरे से सुंदर हैं तो दिमाग से बंदर ज़रूर होंगी. मौका भी इसीलिए दिया गया है क्योंकि सुंदर है. और काम कुछ ख़ास नहीं कर पाएंगी क्योंकि क़ाबिलियत के नाम पर सुदंरता ही तो है. प्रियंका और मायावती पर नेताओं के बोल ये दोहरे मानदंड एक बार फिर देखने को मिले जब प्रियंका गांधी को कांग्रेस का महासचिव बनाया गया. तब भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की टिप्पणियां कुछ इस प्रकार थीं. "लोक सभा चुनाव में कांग्रेस चॉकलेट जैसे चेहरे सामने ला रही है." "इससे उत्तर प्रदेश में बस ये फ़ायदा होगा कि कांग्रेस की चुनाव सभाओं में कुर्सियां खाली नहीं दिखेंगी". "वोट चेहरों की सुंदरता के बल पर नहीं जीते जा सकते." पर ऐसा ...